बिद्या दायीनी माता Children's Poem by Senior Author Ranjushree Parajuli

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सरस्वती माता विद्यादायिनी

स्वत बस्त्र अति सुन्दर धारिणी

बिणा बजाइ भक्त्तहरु रमाइ

 हम्श बाहिनी भक्त्तहरुकी माता

बसन्त र्तुमा यत्रतत्र फैलिन्छौ

भक्त्तहरु बीच बिद्या छर्छौ

गर्छौ प्रणाम बिद्या दायिनी

जग सब बिच चेत दायिनी

 आमा तिमी बिन जग अधेरो

झार्छै ज्ञानको अटुट पन्धेरो

भोग लगाइ फलफुल पेडा धूप दीप बस्त्र अनि नैबेद्धे

भाइबैनी सकल समस्त एक चित्त भैकन

अति मस्त कलम कापी पुस्तक च्यपी बिद्याराभ्भ गर्दछन

रमाइ कर जोरी माता भक्त्ती गर्छु अन्जान मुर्ख

भक्त तिम्रो पढ्न सिकाउ ज्ञान बढाउ तिमी बिन छैन केही उज्यालो

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